सुबह की शुरुआत शिवप्रसाद के घर के एक खुशनुमा माहौल से होती है, जहाँ वह अपने बच्चों के साथ ब्रेकफास्ट की मेज पर बैठा है। पीहू अपने पापा से लाड लड़ाते हुए मजाक करती है कि आज स्कूल में एक्स्ट्रा होमवर्क की सजा न मिले, वहीं ओमकार बड़े प्यार से कहता है, “पापा आज जल्दी घर आना।” शालिनी किचन से चाय लेकर आती है और उसकी नजरें शिवप्रसाद पर टिक जाती हैं। कल रात हुई तकरार और आमने-सामने की बहस के बाद भी शालिनी के दिल में शक की चिंगारी बाकी है। वह चेहरे पर एक बनावटी मुस्कुराहट तो ले आती है, पर उसकी आँखों में छिपा तनाव साफ नजर आता है। शिवप्रसाद उसका हाथ थामकर धीरे से कहता है कि आज शाम को सगाई की पार्टी है, इसलिए तैयार रहना। शालिनी हामी तो भर देती है, पर उसके मन में बस एक ही सवाल कौंध रहा है कि आखिर यह राज कब तक छिपा रहेगा?
पूरे दिन घर में सगाई की तैयारियों की गहमागहमी रहती है। शालिनी अपनी पसंदीदा साड़ी चुनती है और बच्चों के कपड़े सेट करती है। इसी बीच, शिवप्रसाद फोन पर कुछ गुप्त मैसेज चेक करता है जो सीधे तौर पर उसके मिशन से जुड़े लगते हैं, लेकिन वह यह सब बड़ी होशियारी से शालिनी की नजरों से बचाकर करता है। शालिनी इसे नोटिस तो करती है पर खामोश रहती है। जैसे ही शाम ढलती है, पूरा परिवार सज-धजकर सगाई की रस्म के लिए निकल पड़ता है।
वेन्यू पर पहुँचते ही माहौल एकदम जादुई होता है। शानदार लाइट्स, बेहतरीन सजावट और संगीत की धुन से पूरी जगह जगमगा रही है। कबीर और आराध्या रिंग सेरेमनी के लिए जैसे ही स्टेज पर आते हैं, लोग तालियों से उनका स्वागत करते हैं। इसी बीच, आयुषी शालिनी के पास आती है और तंज कसते हुए मजाक में कहती है, “शालिनी तेरी कार कितनी पुरानी हो गई है, आज के दौर में तो ऐसी सगाई में आने के लिए कम से कम एक नई कार होनी चाहिए थी।” शालिनी इसे एक फीकी हंसी के साथ टाल देती है, लेकिन अंदर ही अंदर उसे काफी बुरा महसूस होता है। आयुषी यहीं नहीं रुकती, वह फिर कहती है कि शिवप्रसाद तो आज भी किसी हीरो से कम नहीं लग रहा, पर तू इतनी टेंशन में क्यों है? शालिनी बस इतना ही कह पाती है कि वह थोड़ी थक गई है।
तभी मुख्य रस्म शुरू होती है। कबीर और आराध्या एक-दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं और पूरा हॉल खुशी से गूंज उठता है। कबीर प्यार से आराध्या को गले लगाता है। जैसे ही संगीत तेज होता है, सब डांस फ्लोर पर उतर आते हैं। शिवप्रसाद बड़े ही रोमांटिक अंदाज में शालिनी का हाथ पकड़कर उसे डांस के लिए ले जाता है। कुछ पलों के लिए शालिनी अपना सारा दुख और तनाव भूलकर शिवप्रसाद की बाहों में खो जाती है। पीहू और ओमकार की मस्ती भरे डांस को देखकर हर कोई मुस्कुराने लगता है।
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लेकिन इसी बीच एक मोड़ आता है। डांस करते वक्त शिवप्रसाद की जेब में फोन वाइब्रेट होता है। वह चुपके से मैसेज देखता है जिसमें लिखा होता है कि दुश्मन अब उसके परिवार को निशाना बनाने वाले हैं। यह पढ़ते ही उसका चेहरा सफेद पड़ जाता है और वह तुरंत फोन छिपा लेता है। शालिनी की पारखी नजरों से यह छिप नहीं पाता। वह डांस रोककर पूछती है कि क्या हुआ? शिवप्रसाद इसे ऑफिस का काम बताकर टालने की कोशिश करता है, जिससे शालिनी का शक और गहरा हो जाता है। वह गुस्से में कहती है, “आज पार्टी के दिन भी तुम इस फोन से दूर नहीं रह सकते?”
पार्टी आगे बढ़ती है, केक काटा जाता है और सब खुशियाँ मनाते हैं। कबीर और आराध्या सबका शुक्रिया अदा करते हैं। लेकिन शिवप्रसाद का दिमाग अब पूरी तरह मिशन में उलझ चुका है। वह चुपके से वेन्यू से बाहर जाकर अपने सीनियर को कॉल करता है और कहता है, “मेरी फैमिली को खतरा है, सुरक्षा कड़ी करनी होगी।” कॉल खत्म कर वह वापस पार्टी में शामिल हो जाता है।
घर लौटते समय कार में सन्नाटा पसरा रहता है। शिवप्रसाद जब खामोशी तोड़ने की कोशिश करता है, तो शालिनी सीधे शब्दों में कह देती है, “मुझे पता है तुम कुछ बहुत बड़ा छिपा रहे हो। पार्टी इतनी अच्छी थी पर तुम्हारा ध्यान कहीं और ही था।” शिवप्रसाद उसका हाथ पकड़कर भरोसा दिलाता है, “मैं तुम सबकी हिफाजत कर रहा हूँ, बस थोड़ा वक्त दो।” शालिनी अपनी आँखें बंद कर लेती है और अनगिनत आशंकाओं में डूब जाती है।
घर पहुँचकर जब बच्चे थककर सो जाते हैं, तब बेडरूम में असली ड्रामा शुरू होता है। शिवप्रसाद उसे समझाने की कोशिश करता है, लेकिन शालिनी आखिरी चेतावनी देते हुए कहती है, “मुझे सच बताओ वरना यह रिश्ता टूट जाएगा।” शिवप्रसाद के पास कोई जवाब नहीं होता और वह खामोश खड़ा रहता है। एपिसोड के आखिरी सीन में कैमरा शिवप्रसाद के फोन पर जूम होता है, जहाँ एक नया खौफनाक मैसेज आता है— “तुम्हारी बीवी को सब पता चल गया तो सब खत्म।” परशुराम की आँखों में अब गुस्सा और डर एक साथ दिखाई देता है। एपिसोड इसी जबरदस्त सस्पेंस और डर के साथ खत्म होता है।

