एपिसोड की शुरुआत शिवप्रसाद के घर के बेहद प्यारे सीन से होती है। शिवप्रसाद बच्चों को स्कूल के लिए तैयार कर रहा है। छोटी पीहू अपने पापा के साथ ढेर सारी मस्ती करती है और अपने टिफिन में एक एक्स्ट्रा पराठा मांगती है, वहीं ओमकार अपना होमवर्क चेक करवा रहा है। शालिनी किचन में चाय बना रही है, लेकिन उसके चेहरे पर बीती रात का तनाव साफ दिखाई देता है। शिवप्रसाद उसे प्यार से गले लगाता है और वादा करता है कि आज वह जल्दी घर लौट आएगा। शालिनी मुस्कुराती तो है, पर उसके मन के अंदर एक गहरा शक पैदा हो रहा है।
शिवप्रसाद तैयार होकर घर से निकलने लगता है, तभी उसके फोन पर एक सीक्रेट कॉल आती है जो असल में एक मिशन का अलर्ट है। वह शालिनी से बहुत ही कैजुअली कहता है कि ऑफिस में एक जरूरी मीटिंग आ गई है। शालिनी टोकते हुए पूछती है कि क्या आज फिर देर से आओगे? वह उसे किस करके वहां से निकल जाता है। शालिनी बच्चों को स्कूल छोड़ती है और पूरे रास्ते यही सोचती रहती है कि आखिर वह रोज-रोज यह झूठ क्यों बोल रहा है।
फिर सीन बदलता है और शिवप्रसाद पूरी तरह से ‘परशुराम’ के अवतार में आ चुका है। वह एक सुनसान गोदाम जैसी जगह पर पहुंचता है जहां ड्रग डीलर्स का गैंग एक गैर-कानूनी डील कर रहा है। वह बेहद खामोशी से अंदर घुसता है और गुंडों को देखते ही उन पर टूट पड़ता है। यहां एक जबरदस्त लड़ाई देखने को मिलती है—ताबड़तोड़ पंचेस, किक्स, गन फायरिंग और स्मार्ट मूव्स! नील भट्ट का फुल स्वैग और इंटेंस लुक यहां कमाल का था। गुंडे एक-एक करके ढेर हो जाते हैं। परशुराम एक गुंडे को दबोचकर पूछता है कि अगला बड़ा प्लान क्या है, और डर के मारे वह गुंडा कुछ सुराग दे देता है। मिशन कामयाबी से पूरा होता है और वह पुलिस को खबर देकर वहां से निकल जाता है।
इधर घर पर शालिनी, शिवप्रसाद के कपड़े चेक करती है। उसे कपड़ों में खून के धब्बे और एक छोटा सा छिपा हुआ डिवाइस मिलता है। उसे देखते ही शालिनी का दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है। वह घबराकर अपनी दोस्त को फोन करती है और कहती है कि मुझे यकीन है शिवप्रसाद कुछ बहुत बड़ा राज छिपा रहा है। उसकी दोस्त उसे आमने-सामने बात करने की सलाह देती है, पर शालिनी गुस्से में फोन पटक देती है और गहरी सोच में डूब जाती है।
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शाम को शिवप्रसाद बिल्कुल नॉर्मल बनकर घर लौटता है। बच्चे दौड़कर उसे गले लगाते हैं। तभी शालिनी सीधा हमला करती है और पूछती है कि आज फोन पर फायरिंग की आवाज क्यों आ रही थी? शिवप्रसाद उसे टालने की कोशिश करता है और कहता है कि क्या बकवास कर रही हो, मैं तो ऑफिस में था। शालिनी का गुस्सा फट पड़ता है। वह रोते हुए कहती है कि तुम हमेशा झूठ बोलते हो, बच्चों के सामने नॉर्मल होने का नाटक करते हो पर अंदर क्या छिपा रहे हो? वह कहती है कि वह उससे प्यार करती है पर अब उसका भरोसा टूट रहा है। शिवप्रसाद अंदर से बहुत गिल्टी महसूस करता है और उसे गले लगाकर कहता है कि सब ठीक हो जाएगा, बस मुझपर यकीन रखो। पर वह अपना राज नहीं खोलता क्योंकि उसे पता है कि इससे उसकी फैमिली की जान खतरे में पड़ सकती है।
शाम को पूरी फैमिली को ‘छोटी’ की सगाई की पार्टी में जाना होता है। सब सज-धजकर तैयार होते हैं। शालिनी ने बेहद सुंदर साड़ी पहनी है और बच्चे बहुत एक्साइटेड हैं। पार्टी वेन्यू पर पहुंचकर खूब नाच-गाना और मस्ती होती है। अंगूठियों का लेन-देन होता है और शिवप्रसाद, शालिनी के साथ एक बहुत ही रोमांटिक डांस करता है। माहौल बहुत खुशियों भरा है, लेकिन इसी बीच शिवप्रसाद का फोन फिर से वाइब्रेट होता है। वह चुपके से मैसेज देखता है जिसमें एक नई धमकी आई है। शालिनी यह नोटिस कर लेती है और उसका शक फिर गहरा जाता है। जब एक रिश्तेदार उसे एन्जॉय करने को कहता है, तो भी उसका ध्यान कहीं और ही भटका रहता है।
पार्टी खत्म होने के बाद सब घर लौटते हैं। शिवप्रसाद बच्चों को सुला देता है। बेडरूम में शालिनी फिर वही सवाल दोहराती है कि पार्टी में भी तुम फोन क्यों चेक कर रहे थे? वह मना कर देता है, पर तभी उसके फोन पर एक नया मैसेज चमकता है— “तुम्हारी फैमिली अब हमारा टारगेट है।” यह देखते ही परशुराम के चेहरे पर गहरी चिंता और तनाव छा जाता है। उसकी आंखों की चमक गायब हो जाती है। एपिसोड एक जबरदस्त सस्पेंस के साथ खत्म होता है। क्या शालिनी को अब सच पता चल जाएगा? क्या परशुराम की यह डबल लाइफ सबके सामने आ जाएगी? अगले एपिसोड में आने वाले हैं और भी बड़े ट्विस्ट!

